
चैनल 9 . लाइफ
दुर्ग। भारतीय राजनीति के सबसे शालीन, संयमी और सर्वमान्य नेताओं में शामिल स्व मोतीलाल वोरा की जयंती पर आज दुर्ग में जनसैलाब उमड़ा। राजेंद्र पार्क चौक स्थित बाबू जी की प्रतिमा स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सुबह से लोगों का तांता लगा रहा। बड़ी संख्या में नागरिक, कांग्रेस कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि व विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान बाबूजी के साथ जुड़े अपने-अपने अनुभव साझा किए गए।

वोरा जयंती के अवसर पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने पत्र के माध्यम से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने पत्र के माध्यम से मोतीलाल वोरा के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की उपस्थिति में राजीव भवन रायपुर में भी पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। कांग्रेस पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं ने उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम स्थल पर बाबूजी को भावभीनी श्रद्धांजलि देने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पहुंचे। छत्तीसगढ़ के पूर्व महाधिवक्ता कनक तिवारी ने भावुक स्मृतियाँ साझा करते हुए कहा कि मुझे पत्रकार बनाने का पूरा श्रेय मोतीलाल वोरा को जाता है। उनकी स्मृति में अपने लेखों की एक किताब लिखी है -‘यह देश किसका है?Óइस पुस्तक को वोरा जी की स्मृति को समर्पित किया है। उनकी शोहरत किसी आग से उठते धुएँ की तरह थी, जिसने बड़े-बड़े लोगों को भी चकित कर दिया।
कार्यक्रम में सुबह भिलाई विधायक देवेंद्र यादव बाबू जी की प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वोरा जी का संगठन के प्रति समर्पण आज भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए आदर्श है। उन्होंने राजनीति को मूल्य और मर्यादा के साथ जिया।
पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि बाबूजी के साथ हर संवाद अपने आप में एक सीख होता था। उनका आचरण, संतुलन और निर्णय क्षमता आज भी हमारे सार्वजनिक जीवन के लिए दिशा-सूचक हैं। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में बाबूजी से मिलना कभी औपचारिक नहीं होता था। वे हमेशा परिवार की तरह मिलते थे।
पूर्व विधायक मोतीलाल देवांगन ने कहा कि दिल्ली में रहते हुए बाबूजी का मन छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों के बीच ही बसता था। प्रदेश और प्रदेशवासियों की चिंता उनके हर निर्णय में झलकती थी।
पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि दुर्ग की राजनीति से चलकर वोरा जी छत्तीसगढ़ और फिर देश की राजनीति तक पहुंचे, लेकिन वे हमेशा जमीनी नेता बने रहे। उनका कद बहुत ऊँचा था। इतना ऊंचा कद बहुत कम लोगों को नसीब होता है।
स्व मोतीलाल वोरा के सुपुत्र पूर्व विधायक अरुण वोरा ने कहा कि जब बाबूजी मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने मुझसे बहुत शांत स्वर में कहा था कि ‘मुझे यहां तक पहुंचने में 48 वर्ष लगे हैं। जीवन में ऐसा कभी मत करना कि सब कुछ 48 सेकंड में समाप्त हो जाए। यह उनके पूरे जीवन का दर्शन था। बाबूजी के सिद्धांत आज भी उतने ही सार्थक हैं, जितने उस समय थे।
दुर्ग नगर निगम की महापौर महापौर अलका बाघमार, रिसाली महापौर शशि सिन्हा, पूर्व विधायक प्रतिभा चंद्राकर, दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर, पूर्व महापौर आरएन वर्मा, धर्मेंद्र यादव, शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल, फतेह सिंह भाटिया, पूर्व पार्षद हमीद खोखर ने भी सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष अरुण ताम्रकार, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस महासचिव सुबोध हरितवाल, भिलाई महापौर नीरज पाल, पूर्व महापौर शंकर ताम्रकार, राजेंद्र साहू, दीपक दुबे, अयूब खान उपस्थित रहे।


