
चैनल 9 . लाइफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की केंद्र सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर मजदूरों को रोजगार देने की योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी का नाम बदल दिया है। इस योजना का नाम जी राम जी योजना कर दिया गया है। नाम बदले जाने पर दुर्ग में कांग्रेस नेताओं ने गांधी प्रतिमा के सामने एकत्र होकर प्रदर्शन किया।
योजना का नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर ही रखने की मांग की गई। इस दौरान कांग्रेसियों ने रघुपति राघव राजाराम, नरेंद्र मोदी को सद्बुद्धि दे भगवान का भजन भी गाया। इस दौरान दुर्ग जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पूर्व विधायक अरुण वोरा ने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद पिछले 11 वर्षों से कांग्रेस की योजनाओं का नाम बदलने और कांग्रेस की योजनाओं की झूठी वाहवाही बटोरने का काम किया है। सरकार न तो आम नागरिकों के प्रति ईमानदार है, न किसानों के प्रति। ईमानदार महात्मा गांधी का स्वप्न था कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो और लोगों को रोजगार मुहैया हो। इसीलिए केंद्र की कांग्रेस सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी की योजना शुरू की। योजना से ग्रामीणों को हमेशा फायदा हुआ।
दुर्ग जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकार नहीं चाहती कि ग्रामीणों की आर्थिक व्यवस्था सुधरे। भाजपा सरकार की मनरेगा के तहत रोजगार देने की नीयत में ही खोट है। पूर्व में भूपेश बघेल की सरकार में 45 लाख कार्य दिवस मनरेगा में होते थे, जिसमें कटौती कर प्रथम वर्ष में 32 लाख कार्यदिवस किया गया और इस साल 16 लाख कार्य दिवस कर दिया गया। मनरेगा का नाम जी राम जी कर केंद्र की सरकार राजनीति में, सरकार के कार्यों में धर्म और राम जी के नाम का इस्तेमाल कर रही है।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने कहा कि रोजगार को खत्म करने की साजिश की जा रही है। राष्ट्रपति महात्मा गांधी का सम्मान खत्म करने की भी साजिश की जा रही है। यह बापू का बहुत बड़ा अपमान है। भाजपा सरकार चाहती है कि यह योजना बंद हो जाए। पूर्व में मनरेगा के लिए सरपंच व सचिव कार्य योजना बनाकर केंद्र सरकार को देते थे तो कार्य के लिये बजट मिलता था। अब केंद्र से ही कार्य और बजट मंजूर होने पर विसंगति हो जाएगी। कहां काम होना है यह ग्रामीण ही जानते हैं।
प्रदर्शन के दौरान आरएन वर्मा, दीपक दुबे, लक्ष्मण चंद्राकर, अल्ताफ अहमद, दानेश्वर साहू, उषा सोने, रिवेंद्र यादव, अजय मिश्रा, राजकुमार पाली, नासिर खोखर, सुशील भारद्वाज, संजय कोहले, प्रेमलता साहू, संदीप वोरा, संजू धनकर, प्रकाश नाहटा, कमलेश साहू, संतोष बाफना, निकिता मिलिंद, राकेश हिरवानी, रत्ना नारमदेव, श्रीकांत वर्मा, उमेश साहू, पालेश्वर ठाकुर, हितेश निर्मलकर, विनोद सेन, चिराग शर्मा, यश बाकलीवाल, गौरव उमरे, त्रिशरण डोंगरे, निक्की सिंह, सहित अन्य दुर्ग ग्रामीण व दुर्ग शहर के कांग्रेसी उपस्थित रहे।


