Friday, January 30, 2026
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भाजपा सांसद के बयान से राजनीति गरमाई : कहा – राज्य के निर्माण और यहां के विकास में वीसी, वोरा और श्यामाचरण का बड़ा योगदान : अटकलों का नया दौर शुरू

चैनल 9 . लाइफ

रायपुर। राजधानी रायपुर में हाल ही में छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद के रजत जयंती कार्यक्रम में प्रदेश के दिग्गज नेता सांसद बृजमोहन अग्रवाल की स्पीच ने प्रादेशिक राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। बृजमोहन ने भरी सभा में कह दिया कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण और यहां के विकास में कांग्रेस नेता वीसी शुक्ल, मोतीलाल वोरा और श्यामाचरण शुक्ल जैसे नेताओं का बड़ा योगदान है। भाजपा सांसद द्वारा कांग्रेस नेताओं की तारीफ किये जाने से भाजपा खेमे की बेचैनी बढ़ गई है। भाजपा सरकार और संगठन से बृजमोहन की लगातार बढ़ती नाराजगी को देखते हुए इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद के कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और भाजपा के दिग्गज सांसद बृजमोहन अग्रवाल एक ही मंच पर मौजूद थे। बृजमोहन ने जिस अंदाज में भरी सभा में कांग्रेस नेताओं की तारीफ की, उससे अटकलों का दौर शुरू हो गया है। अटकलें लगाई जा रही है कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल क्या भाजपा को टाटा, बाय-बाय करने वाले हैं। भाजपा से बढ़ती दूरियों के बाद क्या बृजमोहन अग्रवाल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं?

छत्तीसगढ़ में भाजपा को स्थापित करने वाले टॉप नेताओं में शामिल  

अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने में पूरे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का बोलबाला रहा। एमपी में कांग्रेस विरोधी लहर चलने पर भी छत्तीसगढ़ के इलाके में कांग्रेस की तूती बोलती थी। उस दौर में बृजमोहन अग्रवाल उन टॉप नेताओं में शामिल थे जिन्होंने भाजपा को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजधानी रायपुर में बृजमोहन के प्रभामंडल आगे कांग्रेस बार बार बौनी साबित होती रही। जीवन में कभी चुनाव न हारने वाले अजेय बृजमोहन अग्रवाल को भाजपा की लीडरशिप ने अज्ञात कारणों से कभी भी राज्य का टॉप लीडर नहीं बनने दिया।

सीनियर बृजमोहन की बजाय जूनियर रमन को दी अहमियत  

राज्य निर्माण के बाद से बृजमोहन को वैसी तवज्जो नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे। राज्य में चार बार भाजपा को बहुमत मिला, लेकिन काबिलियत और सीनियारिटी के बाद भी उन्हें सीएम की कुर्सी से दूर रखा गया। राज्य की भाजपाई राजनीति में बृजमोहन के जूनियर डॉ रमन सिंह को लगातार तीन बार छत्तीसगढ़ का सीएम बनाया गया। सीएम पद पर ताजपोशी से पहले रमन सिंह को केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया। अजेय बृजमोहन को काबिलियत के मुकाबले पर्याप्त तवज्जो नहीं दी गई।

डेढ़ साल से आरपार के मूड में “मोहन” 

दिसंबर 2023 में विष्णुदेव साय की सरकार में बृजमोहन को शिक्षा मंत्री बनाया गया। केवल 5 माह बाद उनसे इस्तीफा ले लिया गया। पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव की टिकट दी। सांसद चुनाव जीतने के बाद बृजमोहन को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। अनुभवी बृजमोहन की बजाय बिलासपुर के युवा सांसद तोखन साहू को केंद्रीय मंत्री बनाया गया। राज्य की सत्ता से बेदखल किये गए बृजमोहन ने इसके बाद साय सरकार को घेरना शुरू कर दिया। जनहित के मुद्दों पर लगातार लेटर बम से धमाके करते रहे। साय सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े किये गए। कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं सहित हर मुद्दे पर बृजमोहन ने साय सरकार पर हमला बोला। बालोद जिले में नेशनल जंबूरी के आयोजन को लेकर हुए विवाद में सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में केस दायर कर दिया। जंबूरी के प्रकरण से न सिर्फ शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बल्कि पूरी सरकार घिर गई है। अब कांग्रेस नेताओं की तारीफ कर बृजमोहन सुर्खियों में हैं।

 

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